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बीमार कुत्ता

वो बीमार कुत्ता  जो दरवाजे के पास, गोल गोल चक्कर लगाता था,  शून्य के इर्द-गिर्द! गिर जाता था, फिर होश संभाल कर, घूमने लगता था, उसे जाना नही था कहीं, बस यूँ  ही काट देनी थी, अपनी बची खुची ज़िन्दगी। आज किसी भीड़ मे जब , एक ख्वाब से, हाथ छुड़ा कर घर आया, तो बड़ी देर तक जेहन में,  वो कुत्ता, गोल गोल घूमता रहा ।

आरजू

एक सड़क हो लंबी सीधी सी, और दोनों ओर वीराने हो, कुछ चेहरे हो अंजाने से, और भूले-बिसरे गाने हो. एक शाम हो कुछ ऐसी लंबी , के ना तिमिर थके , ना मिहिर थके, एक ऐसे सफ़र की आरजू है हमें !! कुछ दूर चलूं तो दूर कहीं, एक झोपड़ हो सूना सूना, छत से लटकी हो लालटेन, खामोश सा हो कोना कोना, ना पास हो कुछ बेशक़ लेकिन, एक आस रहे , विश्वास रहे. एक ऐसे सफ़र की आरजू है  हमें !! हो भीगी-भीगी सी सड़के , कुछ बूंदे बस संवादी हो, कुछ यादें बासी-बासी हों, खो जाने की आज़ादी हो. कुछ ख्वाहिश हो मद्धम-मद्धम, एक प्यास रहे, आभास रहे. एक ऐसे सफ़र की आरजू है हमें !! एक विहग दिखे ऐसे नभ मे, मानो फिरता मारा-मारा, मेरी तरह पथ भूला सा, मेरी तरह कुछ आवारा!! इतनी शक्ति हो पंखों मे, के ना चाह थामे , ना राह थामे, एक ऐसे सफ़र की आरजू है हमें!!

फरियाद

मैने ये तो कभी नही चाहा , कि  फलक से तोड़ कर , अपनी टेबल पर सज़ा लूँ चाँद, या फिर मेरी घर की किसी दीवार पर, चमगादड़ के मानिंद लटका रहे, कोई इंद्रधनुष ! रात का इंतज़ार भी, बखूबी किए लेता हूँ, टेबल पर सर रखकर उंघते हुए, और ये भी जानता हूँ के कुदरत की Drawing class भी, रोज़-रोज़  नही लगती. बेशक़ , कि हर खूबसूरत चीज़,  हमारी ही हो जाए, ऐसा तो हमने कभी नही माँगा. हाँ!बस ये गुज़ारिश है अपनी, के बित्तो से मापने हैं फ़ासले हमको. उम्मीदों से  कहीं दूर ना निकल जाना ! हालाकी ! सुना है चाँद तो बहरा है, क्या सुनेगा वो फरियाद मेरी ? मैने भी कभी कान नही देखे उसके. और , इंद्रधनुष भी शायद ही पढ़ पाता होगा! अब एक तू ही है  जो  बचा सकती है, इस नज़्म को बेकार  जाने से.

सुक्रगुज़ार

ज़िंदगी ! मैं तेरा कुछ और सुक्रगुज़ार होता गर, पैरो से हमारे टकरा जाती कोई अजनबी लहर, और आसमान मे हौले से चाँद निकल आता! ज़िंदगी ! मैं तेरा कुछ और सुक्रगुज़ार होता ! ज़िंदगी ! मैं तेरा कुछ और सुक्रगुज़ार होता गर, अक्सर हमारे चाय की प्यालियाँ ट्रे मे टकरा जाया  करती और मेरे अख़बार के चंद पन्ने उसकी हाथो मे होते! ज़िंदगी ! मैं तेरा कुछ और सुक्रगुज़ार होता ! ज़िंदगी ! मैं तेरा कुछ और सुक्रगुज़ार होता गर, उसकी आखों से छलक पड़ते दो आह्लाद क आँसू, मेरी जेब से निकले  चंद सिक्के अनमोल हो जाते! ज़िंदगी ! मैं तेरा कुछ और सुक्रगुज़ार होता! ज़िंदगी ! मैं तेरा कुछ और सुक्रगुज़ार होता गर, तेरे इम्तिहान मे हमारे लिए सवाल एक से होते, और मैं उसकी नकल करके पास हो जाता! ज़िंदगी ! मैं तेरा कुछ और सुक्रगुज़ार होता! ज़िंदगी ! मैं तेरा कुछ और सुक्रगुज़ार होता गर, उसकी दुआओं मे कहीं हमारा भी नाम होता और शायद, मेरे  पास माँगने को कुछ भी नही.. ज़िंदगी ! मैं तेरा कुछ और सुक्रगुज़ार होता!!

ख्वाहिशे..

बड़ी  कुत्ती  चीज़  हैं  ये  ख्वाहिशें   भी यूँ ही सफ़र कभी खतम नहीं होते   ना मिला तो सबकुछ, मिल गया तो  ख़ाक !